हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎉💐✨

💫अगस्त 26, 2025: सुबह की भावपूर्ण साधना के मुख्य आकर्षण🎼

🌷✨जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की जय!✨🌷

जगद्गुरु आदेश:

भगवान् सबके हृदय में रहते हैं - इसका अभ्यास करो

उपदेश तो हम बहुत सुने और जानते भी हैं, लेकिन प्रैक्टिकल में अमल लाने के लिए अभ्यास करना आवश्यक है। सम्मलेन (साधना शिविर) इसलिये होता है कि जो कुछ हमें इसमें मिला, उसको आगे बढ़ाना है। अगर हम हमेशा वहीं के वहीं रह गए, तो ऐसे तो ये मानव देह समाप्त हो जायेगा।


ये हमारा निवेदन है कि आप लोग एक छोटा सा आदेश मानकर रोज़ अभ्यास करें -


1) जैसे वेदों शास्त्रों, संतों ने कहा है, भगवान् सबके हृदय में रहते हैं, यह 'सदा' जानते रहने का हमें अभ्यास करना चाहिये। जैसे 'मैं' को सदा रियलाइज़ करते हो, उसी तरह 'मेरा' वो अंदर बैठा है, उसकी फीलिंग भी एक साथ होनी चाहिये। हर आधे घंटे में एक सेकंड को फील करो कि भगवान् हमारे अंदर बैठे हैं। इससे पाप करने से बचोगे। और इसी प्रकार अभ्यास करते-करते नेचुरल होने लग जायेगा - फिर जैसे 'मैं' को रियलाइज़ करते हैं, वैसे भगवान् को भी रियलाइज़ करोगे। ये अभ्यास से ही होगा। अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते - अभ्यास से सब कुछ हो जाता है।


2) साथ साथ स्वयं का आत्मनिरीक्षण करो। सहनशीलता कितनी बढ़ी, अहंकार कितना कम हुआ आदि पैमाना हैं। छोटी-छोटी बातों पर फील करना, क्रोध करना, दूसरों को दुखी करना, ये सब हमारे प्रैक्टिकल साधना में कमी के लक्षण हैं। हर एक महीने में दस मिनट निकालकर अध्ययन करना चाहिए कि क्या हम आगे बढ़ रहे हैं। अगर नहीं बढ़े तो फील करके संकल्प करना कि अब की बार ऐसे नहीं होने देंगे। यह निश्चय कर लो कि "(किसी के बात पर) फीलिंग नहीं होने देंगे। क्रोध पर क्रोध करेंगे। किसी को दुखी नहीं करेंगे।"



सब तरह की भगवत्कृपा को रियलाइज़ करके अभ्यास करो।

कीर्तन:

- कुँवरि! हौं, मानत हौं निज दोस (प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी, पद सं. 37)

- कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी (ब्रज रस माधुरी, भाग 3, पृष्ठ सं. 77, संकीर्तन सं. 26)

- ब्रज के सवैये

राधे तेरी कृपा शुक ज्ञानी, भये अति ज्ञानी और ध्यानी भये मुनिमानी

राधे तेरी कृपा विधि वेद रचे, भये व्यास पुरानन के अधिकारी

राधे तेरी कृपा सो त्रिलोक धनी, जो कहावत है ब्रज चंद बिहारी

लोक घटी ते हटी को बचाओ, कृपा करि ओ! वृषभानु दुलारी

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