♻️♻️हमारे महाराज जी ♻️♻️
🌺भक्तवत्सलता 🌺
🌼दिनाँक 28 सितम्बर 2013🌼
श्री महाराज जी ने एक कैंसर रोग से ग्रसित महिला रोगी के बारे में पूरी जानकारी ली। जिनका नाम स्नेहलता था वो मनगढ़ आश्रम वासी थीं उन्हें देखने स्वयं श्री महाराज जी उनके कमरे में गये।
श्री महाराज जी इसके पहले 27 अगस्त 2013 को मनगढ़ से हवाई मार्ग द्वारा वृन्दावन धाम पधार गये थे। वृन्दावन धाम, गोलोक धाम और बरसाना धाम में विभिन्न महोत्सव में व्यस्त रहे। दिनाँक 23 सितम्बर 2013 को ही मनगढ़ धाम लौट कर आये । यद्यपि आप फोन से प्रतिदिन स्नेहलता से बात करते थे और उससे यही कहा करते, अभी चली मत जाना, मैं आ रहा हूँ, मेरे सामने जाना। वो प्रतिदिन आपके आने की प्रतीक्षा करती रही और कहती रही कि ठीक है उनकी जब इच्छा हो तब वे आयें। इसलिये आते ही उसके पास गये। रात्रि में सत्संग के समय जब वो आयी तो उसे अपने गले की माला पहनाई, वो भाव विभोर होकर रोने लगी तो आप भी उसे देखकर द्रवित हो गये। दूसरे दिन जब उसे सत्संग में आने में विलम्ब हो गया तो स्वयं कीर्तन में से उठकर उसे देखने गये। प्रतिदिन अपना प्रसाद उसके लिये भिजवाते रहे।
दो दिन बाद वो फ़िर रात में आपके दर्शन के लिये नहीँ आ सकी। क्योंकि दिन प्रतिदिन उसकी हालत बिगड़ती ही जा रही थी। तो जब आप रात में विश्राम करने चले गये, अपने बिस्तर पर सोने के लिये लेट गये थे कि अचानक उठकर बाहर आ गये और बड़ी शीघ्रता से उसे देखने उसके कमरे में गये और उससे कहा अरे तू आज मेरे पास नहीँ आयी। मैं सो गया था कि मुझे तेरी आवाज़ आयी वैसे ही मैं तुझे देखने के लिये भागा।
29 सितम्बर 2013 को ही स्नेह दीदी श्री महाराज जी के सम्मुख गोलोकवासी हुईं।
बताओ ऐसा कौन होगा भक्तवत्सल, हमारा रखवार जो क्षण-क्षण अपने शरणागत बच्चों की सदा चिन्ता करता हो, उनकी रक्षा करता हो, अन्तिम समय हरि गुरु स्मरण करते हुये शरीर त्याग करे इसके लिये श्री महाराज जी ने कितना प्रयत्न किया। उसके कमरे में जगह जगह लिखवा दिया। मन को सदा श्रीकृष्ण एवं उनके नाम, रूप, गुण, लीला, धाम तथा उनके स्वजन में ही रखना है।
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ऐसाे है रखवार हमारो।
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प्यारे प्यारे श्री महाराज जी की जय ।
