नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना


नवरात्रि उत्सव पर मां दुर्गा से हम क्या मांगे जो गोपियों ने मांगा था। गोपियों ने मां दुर्गा से यही वरदान मांगा था: कात्यायनी दुर्गे देवी। कात्यायनी दुर्गे देवी गोविंद राधे, तू श्याम की सखी, श्याम से मिला दे। नवरात्रि की उपासना इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए होनी चाहिए।

यहां पर साधक के शब्दों में: हे मां दुर्गे, हे कात्यायनी देवी, तुम तो श्याम सुंदर की सखी हो और सखी की अनुकंपा से श्याम सुंदर मिलते हैं। हे मां, मुझे श्याम सुंदर से मिला दो। गोपी प्रेम की प्राप्ति दुर्गा पूजा का सर्वोच्च लक्ष्य है। जिस गोपी प्रेम की याचना स्वयं नारद जी कहते हैं।

यथा ब्रज गोपी का नाम, जिस गोपी प्रेम को पाने के लिए स्वयं शंकर जी महाराज के समय में नारी शरीर धारण करके ब्रज में प्रवेश किए थे। राधा रानी की कृपा से उनको रास में प्रवेश मिला। तो नवरात्रि में हम सर्वोच्च सामान गोपी प्रेम मांगे मां दुर्गा से।

मां दुर्गा की उपासना सांसारिक सुख, स्वच्छंद्य, सांसारिक विषयों की प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि उनकी कृपा से हमको भक्ति मिल जाए। इसीलिए मां दुर्गा की उपासना होनी चाहिए। शक्ति की उपासना, भक्ति की प्राप्ति के लिए यही नवरात्रि का उद्देश्य होना चाहिए।


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