के साथ क्लास करने गए थे इतना अतिसार हुआ कि हालत खराब हो गई। चलना-फिरना मुश्किल था। तो एक लड़की आई, 14 वर्ष, और उसने कहा, "शंकराचार्य, क्या शास्त्रार्थ करोगे?" तो उन्होंने कहा, "इस समय तो मेरी शक्ति नहीं है, बहना। इस समय मैं शास्त्रार्थ नहीं कर सकता।" तो उन्होंने कहा, "तुम शक्ति को मानते हो क्या? तुमने तो अपने भाष में लिखा है, 'ब्रह्म शक्ति रहित है।'" इतना कह के शक्ति ही थी, साक्षात गायब हो गई। अब शंकराचार्य को फीलिंग हुई कि हां, इतनी बड़ी चीज हमको मिली, हमने पहचाना नहीं। तो जब कोई खाना नहीं खाएगा, तो शक्ति नहीं रहेगी। शक्ति नहीं रहेगी, तो प्यार नहीं कर सकेगा। और जब प्यार नहीं कर सकेगा, तो पत्थर हो जाएगा। इसलिए मैं खाता हूं।
और फिर कोई आदमी को एक से कचरी उठाना होता है, किसी को पांच से। हमको इतने से प्यार करना है। बहुत बड़ा पोजा है। हमारे खाना चाहिए। योगो ज्यादा खाना भी हानिकारक है, ना खाना भी हानिकारक है। युक्तहार विहारस। ये देखो, ये सब वक्ता लोग हैं। पूछ लो, मैं गीता का कोशन दे रहा हूं। मन ग्रहण नहीं बोल रहा हूं। इनहीं से तो आप सीखे हैं। हां, आप समझी तो बिना सफेद बाल हुए कोई नहीं समझ सकता। समझने के लिए सफेद बाल आवश्यक है। हां, भाई, तुम लोगों से सीखे नहीं, तो पढ़ के सीखा है। नहीं, कुछ सुन के सीखा है। जो सीखा है, उसी का होके सीखा है। अरे, खाना देखो, झका एक्सपर्ट है। कि देखते रहते हैं और तरफ देख रहा है कि ले लिया चश्मा। उतार ले जाते हैं। और क्या कहे, अपनी बीवी के लिए नहीं लगाते हो, ना खुद नहीं लगाओ। सब लोग याद रखो, किसी भी क्षण कोई जा सकता है। यमराज भी बोले, "आप यमराज, दो चले गए अपने पार्टी के।" फिर भी जो बचे हैं, वो कहते हैं, "वो चले गए होंगे, हम छोड़ जाएंगे।" परम सोच रही हूं कि मैं कल जा सकती हूं। बोलो, लेकिन फीलिंग में ये नहीं है कि मैं कल चली जाऊंगी। हो सकता है। तो सभी बोलेंगे, लेकिन होगा ऐसा नहीं। निश्चय है, किसी का निश्चय होना चाहिए। तब प्रगति हो।
कर लो आज और रात भर में करना है। एक मिनट में सब कुछ हो जाता है। अरे, सब कुछ ना होगा, तो कुछ तो हो जाएगा। नहीं, हम कहते हैं, कोई अगर हलवा पूरी ना खाए, खाली मत ही पी ले, तो जिंदा तो रहेगा। नथिंग से समथिंग अच्छा है। अपने कम से कम मानव देह मिल जाए। इतनी तैयारी तो कर ले। अब देखो, एक कुत्ता नेमा है। बचपन से सत्संग करते हैं। हमारा ये बचपन से नाबालिक पिता, छोटी उम्र से कितने लेक्चर सुने, ने सत्संग किया। और उसके बाद सब बेकार है। क्या भगवान, क्या महाराज जी, हटाओ चक्कर। अपना अपना संसार में मस्त। शादी भी नहीं किया, गृहस्ती का प्रपंच भी नहीं। एक बुढ़िया मां को लेकर के अब बस बैकुंठ जाएंगी। कभी शक्ल देखा है इनके सत्संग में? लेकिन महसूस करता है आदमी तब आता है, लाभ लेता है। और जब भगवान को किनारे फेंक देता है, बुद्धि दे है, तो बुद्धि ये सर्वनाश करती है। मनुष्य लोगों को उसने ये कह दिया, मारा पीटा भी नहीं, खाली कह दिया। उसी की फीलिंग हो रही है। इस पर बहुत ध्यान देना चाहिए। सबको अभ्यास करना चाहिए। लेकिन आप लोग सुनते नहीं। संकल्प दृढ़ हो, तो ये मनुष्य भगवान को गोलोक से बुला लेता है। यही बड़ी बात है कि बिना मट्टा पी, मट्ठा खाली मट्ठा पी के हम रह नहीं सकते। तब क्यों? तब क्यों? तो खाली दूध पी के रहती थी कि नहीं? याद ही नहीं। दुनिया में देखा तो है। सब बच्चे दूध पीते हैं, मां का या वो भी फीका। ये जितना जबान की बीमारी लगाया है, तो अब बाद में लगाया। पहले कहां थी ये बीमारी? नमक भी हो उसमें, मिर्चा भी हो उसमें। पिलाने वालों की ना कमी है, ना खाने की कमी है। और मैं चार बार मट्ठा पीता हूं, तो समझ लो, अपने आप को कि हम बहुत गरीब हो गए। ध्यान कर लो। ऐसे ही तो खाली मट्ठा पी के रहना है। एक-दो महीने ढलने का समय है। अब प्रोग्रेस नहीं होगी, पतन होगा धीरे-धीरे। इसलिए शरीर पर केयर करना है। अभी तक परवाह नहीं किया, काम चलता गया। अब करना पड़ेगा। हां, बहुत बड़ा प्रारब्ध खतरनाक। तुम्हारा कोड़े में कट गया। जिन लोगों ने एक्सीडेंट की हालत गाड़ी देखा है, वो लोगों ने कहा है कि कैसे बच गए। इसमें कुछ लोग, इसमें किसी को बचना नहीं चाहिए था। सबको आश्चर्य हो रहा है। ये भगवत कृपा है, जिसके कारण तुम्हारा जीवन सुरक्षित रहा। वैसे तो प्रदीप वगैरह जो संसार से चले गए, उनका टाइम हो गया। तो टाइम हो जाने पर, तो चाहे कोई अपने ड्राइंग रूम में बैठा रहे, वो तो जाएगा ही। वो तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। लेकिन तुमको मुन्नी को जो जीवन दान मिला है, ये बहुत बड़ी बात है। हंसते रहो। बस डॉक्टर जब कह देगा कि हां, तुम बिलकुल क्वाइट राइट हो, तब फिर हम तुमको यहां जिंदा बनाने की परमिशन देंगे। हंसती रहो। बस राधे-हे। विश्वास से बोलती रहो। गोविंदा, नटवर, नागर, नंदा। भजो रे मन गोविंदा। आई खोपड़ा। यू क्यों, क्यों, क्यों बनाया जाए? जो पहले लाया गया है, वो पहले जलेगा। उसको सुनते हैं, तो ऐसा ईर्ष्या होती है हम लोगों को कि हमको छोड़ के आप रेडियो सुन रहे हैं। वो बचपन में एक क्वेश्चन करेगी, तो हम लंबा 101 वाक्य लगातार बोल गए। और बोल के फोन रख दिए। चाहे एक्सीडेंट में जाए, चाहे हाथ पर लेटे जाएगा। वो ना नारायणी नहीं गई। लेटे कौन सा एक्सीडेंट हुआ था? उनका बोलते-बोलते चली गई। सहस्त्र मूर्त बोलो। सह नमोताय। सहस्र मूर्तय नमोताय। नमोस्तु अनताय। माने हे अनंत भगवान, आपको नमस्कार है। आप कैसे हैं? सहस्त्र मूर्त अनंत रूप हैं। आपके एक साथ अनंत रूप वाले आप हैं। नमो तताय। सहस्र मूर्त नमोताय। सह सहस्र पादा। सहस्र पादा सुरो अक्षी। माने आंख हजारों। आपके अनंत पैर हैं, अनंत आंखें हैं। पाद माने चरण, अक्ष माने आंख और सिर अनंत है। और वक्षस्थल अनंत है। शुरू सिर उ और बाहु भुजाएं अनंत हैं। अनंत पादा शिशु रुबावे। अनंत पावे। अनंत नाम में अनंत नाम पुरुषाय शास्वते। पुरुषायते आपके नाम भी अनंत हैं। और आप शाश्वत पुरुष हैं। अनादि काल से आप भगवान हैं। अनंत नाम में पुरुषाय शासते। अनंत नाम पुरुषाय शासते। अनंत कोटि युग धण नमः। अनंत कोटि युग। अनंत कोटि युग धारणी नमः। अनंत कोटि नमः। संस्कृत के श्लोक बुलवा लेता हूं गधों से। अरे भाई, आंख बंद करने की किसी की इच्छा है? तू भी तो याद रहनी चाहिए। भाई, अपने मुख चंद्र को तुम छुपाती हो। हाथ ऐसे तो कहो, छुपेगो चंद हाथन दुराईबो। यह रस खान दिन द्व में बात फैली ज है। दो उनको दो, उन मृद मुस्कबो। दो पड़े पया। दो लेत है बलैया। उन्हें भूल गई। उन्हें गागर उठाईबो। मोहब्बत सुनो, दिल का कहीं तसवुर होता है। तसवुर तो साकार वस्तु का होता है। दिल तो निराकार है, उसका तसवुर कैसे होगा? करो फिर नवधा भक्ति करो। विष्णु भगवान को अपने मन बुद्धि को समर्पित करो। शरणागत होकर के नौधा भक्ति करो। कानून में कोई गड़बड़ नहीं कर सकता। राम जिनके लड़के थे, दशरथ जी को भी मरना था। मरे, उसको कोई कुछ नहीं कर सकता। वहां तो मजबूरी है। जिसके मामा श्री कृष्ण भगवान, बाप अर्जुन, गीता ज्ञानी महापुरुष। तो अभिमन्यु मारा गया। दूसरा कौन दावा करे? बहन भी हो। और वैसा जैसा दृश्य था नेहा का, देखे चक्कर आ जाए। तब भूल जाए कौन है, हमारा कांप जाए। अरे, कितनी खून की धार निकल रही होगी जब सर कटा है उसका। वो दृश्य देखा जाता। किसी पता नहीं कौन सी ईश्वरीय शक्ति ने इनको सब करवा दिया। इनसे अकेले ऐसा केस देख कर के इधर आ कर लेते हैं। कौन झगड़े में पड़े? इनके कहा है, तुम ले जा रहे हो। तुम अपने रिस्क ले जाओ। इनका हम ले जाएंगे। अपने गाड़ी वाले ने कहा है। दो बार में होता है कि भगवान हेल्प करते हैं। शक्ति वहीं से आती है। किसी की मारफत नहीं आती। अपने को पावर हाउस से मतलब। किसी के थ्रू आवे, थ्रू आई। उसका पता लगाओ। दुनिया यहां पे नाटक कौन करे? इन लोगों ने बाद में देखा है। बताया है कि गाड़ी का ऐसा भुर्ता हुआ है कि ये ये दोनों बच कैसे गए। ये तीन-तीन बच गए। कैसे बच गए? ये हमारा ड्राइवर गया था। जीवन तो कहा कि मैंने जिंदगी भर में गाड़ी चलाई है। ऐसा बड़ा एक्सीडेंट मैंने नहीं देखा है। फिर तीन-तीन बच गए। हम भी कहते महाराज जी, ऐसा हो। क्या कह दिया? हमने प्रदीप हो गए। मतलब आप झूठ भी नहीं बोल पाए। और अपना भी बचाव कर गए। और अपना बचाव कर है। या कोई भी पाप है, उसके लिए शास्त्र का आदेश है कि मन निमित्तम कृतम पापम मत धर्माय कल्पते। अगर उद्देश्य सही है, सही है, तो वो अधर्म भी धर्म हो जाता है। संकटे प्राण का संकट आवे, तो वहां झूठ भी बोल सकते हो। सब प्रकार के फ्रीडम है। शास्त्रों में बड़ी बात तो ये हुई कि ये सब कांड में तुमने जो हेल्प किया, वो सारे सत्संगियों के तुम बड़े प्रिय बन गए। और हमारे तो बन ही गए। ये संजोग ये भी तो बन गया ना। और सारे जीवन तुमको अपने आत्मा में संतोष रहेगा। सुख मिलेगा सोच करके कि मेरे हाथ से कितना बड़ा अच्छा काम हो गया। कभी सोचा नहीं था मैंने किया। इतना बड़ा काम मैं इस लाइफ में कर सकूंगा। और बिना किसी प्लान के सब ऑटोमेटिक हो गया। और सब तुम्हारे मुआफिक होते गए। डॉक्टर भी बहु बात व्यवहार की। तमाम बातें सुनना या बोलना टाइम खराब हो, तो मन खराब हो। काम की बात करना चाहिए। चाहे सगी बहन हो, सगा भाई हो, कोई हो। हमारे देश में बीमारी है। दो आदमी बैठे हैं। अरे, बोलती क्यों नहीं? बोलती नहीं। अरे, अनावश्यक क्या बोले? कोई बात हो, तो बोले। नारायण हरि भजन में ये पांचो न सुहा विषय: भोग, निद्रा, हंसी, जगत, प्रीत। बहु बात ये पांच चीजें। दोनों परदेश जा रहे थे। रुपया कमाए। गांव उस जमाने में कोई और था नहीं। पैदल चलते थे। एक जगह कम हो गई। भूखे दोनों। एक के पास धान था और एक के पास सत्तू था। लेकिन धान वाला बड़ा चालाक था। दोस्त और सत्तू वाला बेचारा। गोला बना। तो धान वाले ने सत्तू वाले से कहा, "अरे, तुम्हारे पास सत्तू है। सत्तू क्या लाए हो? सत्तू लपेटू तो तब घबे, तो तब खावे, तो तब चल। बड़ा टाइम लगेगा।" और धान बेचारा भला कूटा खा चला। संक्षेप में बोल दिया कि धान तो बहुत आसान है। उसको कूट लिया और उसको खा लिया। और चल दिए। और सत्तू लपेटू तो कब घबे, तो कब खावे, तो कब चलबे। उसको लंबा करके काम। सत्तू वाला बेवकूफ बन गया। उसने बदल लिया। "भैया, हमको धान दे दो। तुम सत्तू दे दो।" तो सत्तू को उसने अपना पानी पानी डाला और खाया। तैयार हो गया। ये ढूंढ रहे हैं कहां कूदने का। मूसल मिले। मशीन बाकायदा मंगा के हॉस्पिटल से रखी गई थी। कि अगर 100 ग्राम भी कम हो जाएगा, पैराबेट तो उस दिन खा लेंगे। और कमी नहीं हुआ। 52 दिन तक। और साथ घेर के खड़े हो। जब तौलने लगे, सवेरे शाम दो बार तोले। कानपुर में आए उनके यहां प्रेमानंद के घर। तो हमने कहा, "अच्छा, लाओ भाई। अब तो लखनऊ छोड़ दिया। हमने अब खाएंगे। खुद डाट के खाया। लोगों ने कहा, 52 दिन का अनशन चो किया हुआ। पहले मौसम का रस लीजिए, फिर ये लीजिए, वो लीजिए। हमने खाया है सब कुछ। नहीं, पूरा खाना खाया। अब हुई बात कैसे हुई थी? मंजरी है ना, बहुत मोटी। जो हां, तो उन्होंने कहा कि मैंने 10 दिन में अपना 5 किलो वेट कम कर दिया। हमने कहा, "बकवास करती। गलत मशीन में ना पाए। 10 दिन में 5 किलो कम हो जाएगा।" और उन्होंने कहा था, "देख, मैं करता हूं। कह सबका कम होगा।" कहा, "अच्छा, देख लो। प्रत्यक्ष बस ऐसे बातें बाद में शुरू।
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