संसार में हम देखते हैं ना छोटा पौधा बड़ा नाजुक होता है तो भय रहता है कहीं नष्ट ना हो जाए, कहीं बकरी ना चर ले, कोई पशु ना चर ले, ना खा ले इसे। तो चारों तरफ से बाड़ा लगाया जाता है। तो जिस साधक के अंदर भक्ति है, वो यदि छोटे पौधे के रूप में है, तो चारों तरफ अच्छे विचारों का बाड़ा लगाना होगा और बाड़ा लगा के सत्संग रूपी भी जल से उसे सींचना पड़ेगा। तब उसके अंदर से चारों तरफ से शाखाएं, प्रति शाखाएं निकलेंगी, पुष्प, पत्र, फल निकलेंगे, पौधा वृक्ष का रूप धारण कर लेगा।
तो जब साधक की भक्ति छोटी होती है, नाजुक होती है, तो बड़ी भयावनी होती है, डरावनी होती है। डर रहता है, भय रहता है कि कुसंग यदि मिल गया, तो भक्ति नष्ट हो जाती है। सभी साधकों को राधे-राधे। सबको नवरात्रा की बहुत-बहुत बधाई हो। आज नवरात्रा का पांचवा दिवस है। मां दुर्गे भगवान श्री कृष्ण की बुद्धि से प्रकट हुई हैं। इन नवरात्राओं में नौ नामों से जानी जाती हैं, इसलिए नवदुर्गे कहा जाता है, नवरात्रि कहा जाता है।
हिमालय की पुत्री बनी, इसलिए इन्हें शैलजा कहा जाता है, शैलपुत्री। और मां दुर्गे के मस्तक पर चंद्रमा धारण है, इसलिए चंद्रघंटा नाम है इनका। और शंकर जी को पाने के लिए इन्होंने घोर तप किया, इसलिए इनका नाम ब्रह्मचारिणी है। इन्हीं से सूर्य की तपन होती है, इसलिए इनका नाम कुषमांडा नाम है। स्कंद की माता है, इसलिए स्कंद माता नाम है इनका। और कात्यायन ऋषि की पुत्री होने के कारण कात्यायनी देवी हैं। यह मां काली का अवतार लिया, इसलिए काल रात्रि नाम पड़ा इनका। गौर वर्ण की हैं, बहुत गौरी हैं, इसलिए गौरी नाम पड़ा है इनका। और समस्त सिद्धियों की दाता यही है। भगवान शंकर समस्त सिद्धियां इन्हीं से प्राप्त किए हैं, मां दुर्गे से। इसलिए इनका नाम सिद्धि दात्री नाम है।
तो ये नौ दुर्गे का अवतार हुआ ताकि हम इनकी आराधना करके इन्हें प्रसन्न करके, क्योंकि मां दुर्गे अत्यंत करुणाकारिणी हैं। मां सीते अत्यंत करुणाकारिणी हैं। मां राधे अत्यंत करुणाकारिणी हैं। राधा रानी, जगत जननी, सीता माता, मां दुर्गे। क्योंकि यह मां का स्वरूप है, इसलिए सदा कृपा, करुणा ही करती हैं। अरे, जयंत जैसे महापापी को भी जगत जननी सीता माता ने माफ कर दिया। अस्तु, भगवान श्री राम से बोली कि तुम भी इन्हें माफ कर दो। माया के जंजाल में रहते हुए जीव भला पाप ना करें, ऐसा कैसे हो सकता है।
तो मां का स्वरूप, मां दुर्गे, इनसे हमें यही मांगना है कि हे मां, हे माता दुर्गे, तुम हमें श्याम का बना दो, श्याम से मिला दो। श्याम की ही हमें भक्ति प्रदान करो। हम तुम्हें चुनरी चढ़ाएंगे। हमारी कामना, हमारी इच्छा, हमारी रुचि केवल श्याम सुंदर निर्मित ही होनी चाहिए। तो मां दुर्गे से हम प्रार्थना करेंगे कि हे मां दुर्गे, तुम हमें श्याम सुंदर का बना दो, उनकी भक्ति प्रदान कर दो।
यह भक्ति जिस साधक के अंदर होती है, जब वह छोटा पौधे के रूप में होती है, तो देखिए, बड़ा भय रहता है, डर रहता है कि पौधा नष्ट ना हो जाए। तो पौधे जब छोटा स्वरूप में होता है, संसार में हम देखते हैं ना, छोटा पौधा बड़ा नाजुक होता है। तो भय रहता है कहीं नष्ट ना हो जाए, कहीं बकरी ना चर ले, कोई पशु ना चर ले, ना खा ले इसे। तो चारों तरफ से बाड़ा लगाया जाता है। तो जिस साधक के अंदर भक्ति है, वो यदि छोटे पौधे के रूप में है, तो चारों तरफ अच्छे विचारों का बाड़ा लगाना होगा और बाड़ा लगा के सत्संग रूपी जल से उसे सींचना पड़ेगा। तब उसके अंदर से चारों तरफ से शाखाएं, प्रति शाखाएं निकलेंगी, पुष्प, पत्र, फल निकलेंगे, पौधा वृक्ष का रूप धारण कर लेगा।
तो जब साधक की भक्ति छोटी होती है, नाजुक होती है, तो बड़ी भयावनी होती है, डरावनी होती है। डर रहता है, भय रहता है कि कुसंग यदि मिल गया, तो भक्ति नष्ट हो जाती है। ये कुसंग ना मिले। चारों तरफ से हमें भगवान का मनन करना होगा, चिंतन करना होगा। सत्संग रूपी जल से अपनी भक्ति को सींचना होगा। तब यह भक्ति रूपी वृक्ष बड़ा होगा, इसकी अनेक शाखाएं, उपशाखाएं निकलेंगी और फल मिलेगा उसका। तो समय-समय पर सत्संग करते रहना चाहिए। जब भी समय मिले, चिंतन, मनन, पठन करते रहना चाहिए। निरर्थक बातें ना करें, निरर्थक विचार ना करें। जब समय मिले, जगतगुरु श्री कृपालु जी महाराज की पुस्तक उठा के पढ़ते रहिए, तत्व ज्ञान को पक्का करते रहिए। जब तत्व ज्ञान पक्का हो जाएगा, तो फिर साधना की प्रैक्टिस में देरी नहीं लगेगी।
तो भगवान का चिंतन, मनन, स्मरण, ध्यान करते रहिए। और एक चीज का विशेष ध्यान कीजिए कि कब तक हम इस माया के जंजाल से बचे रहेंगे। तो बार-बार, बार-बार यहां पर सत्संग का लाभ भी लेना होगा। जब बार-बार सत्संग का लाभ मिलता रहेगा, सत्संग मिलता रहेगा, तो हमारे भक्ति पर, हमारी साधना पर सत्संग रूपी जल पड़ता रहेगा। तो हमारी भक्ति बढ़ती रहेगी। ये छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना है और निरंतर मन डूबा रहे, इस बात का विशेष ध्यान रखना है। शेष फिर कभी बताएंगे। सबको राधे-राधे। हैप्पी नवरात्रि। नवरात्रि की ढेर सारी बधाई हो सबको। सबकी नवरात्रि बड़ी सुखमय, आनंदमय, भक्तिमय बीते। राधे राधे।


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